Old Pension Scheme भारत में पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme – OPS) सरकारी कर्मचारियों के लिए एक भरोसेमंद व्यवस्था रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह था कि सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद कर्मचारी को जीवन भर आर्थिक सुरक्षा मिलती रहे। OPS के तहत कर्मचारी को उसके अंतिम वेतन के आधार पर हर महीने एक निश्चित पेंशन मिलती थी, जिससे उसे बुढ़ापे में पैसों की चिंता नहीं रहती थी।
यह योजना न सिर्फ आर्थिक स्थिरता देती थी बल्कि सेवानिवृत्त व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का भरोसा भी देती थी।
पुरानी पेंशन योजना का स्वरूप
Old Pension Scheme एक निर्धारित लाभ आधारित योजना थी। इसके अंतर्गत रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को उसके अंतिम वेतन का लगभग आधा हिस्सा मासिक पेंशन के रूप में मिलता था। इसके साथ ही महंगाई भत्ता (DA) भी समय-समय पर बढ़ता रहता था।
इस योजना में कर्मचारी को किसी तरह का निवेश नहीं करना पड़ता था। पूरी पेंशन राशि सरकार सीधे अपने खजाने से देती थी। बाजार में उतार-चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं पड़ता था, इसलिए यह योजना पूरी तरह सुरक्षित और गारंटीड मानी जाती थी।
2004 में क्यों बदली गई पेंशन व्यवस्था
सरकार ने 1 जनवरी 2004 से पुरानी पेंशन योजना को बंद कर राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) लागू की। NPS एक योगदान आधारित योजना है, जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं और पेंशन की राशि बाजार से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती है।
इस बदलाव का मुख्य कारण सरकार पर बढ़ता हुआ पेंशन खर्च था। OPS के कारण केंद्र और राज्य सरकारों के बजट पर भारी दबाव पड़ रहा था, जिसे लंबे समय तक संभालना मुश्किल हो रहा था।
पुरानी पेंशन से जुड़ी वित्तीय चुनौतियां
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुरानी पेंशन योजना को पूरी तरह वापस लाया गया, तो इससे सरकार के खर्च में भारी बढ़ोतरी होगी। जैसे-जैसे लोगों की उम्र बढ़ रही है और जीवन प्रत्याशा लंबी हो रही है, पेंशनभोगियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
इससे विकास योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए फंड की कमी हो सकती है। इसलिए सरकार को संतुलन बनाकर चलना पड़ता है।
2026 में पेंशन को लेकर जारी बहस
वर्ष 2026 में OPS को लेकर बहस तेज है। कई कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना की वापसी की मांग कर रहे हैं। कुछ राज्य सरकारें हाइब्रिड पेंशन मॉडल पर काम कर रही हैं, जिसमें OPS जैसी सुरक्षा और NPS जैसी स्थिरता दोनों शामिल हों।
उदाहरण के तौर पर, तमिलनाडु ने एक ऐसी योजना शुरू की है जिसमें अंतिम वेतन का आधा हिस्सा पेंशन के रूप में देने की गारंटी दी जाती है।
केंद्र सरकार का स्पष्ट रुख
केंद्र सरकार का कहना है कि पूरी तरह OPS को वापस लाना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि इसमें कानूनी और वित्तीय दोनों तरह की बाधाएं हैं। सरकार मानती है कि NPS ज्यादा टिकाऊ व्यवस्था है, हालांकि इसमें सुधार की गुंजाइश जरूर है ताकि कर्मचारियों की चिंताओं को कम किया जा सके।
किन लोगों को मिलता है सबसे ज्यादा फायदा
पुरानी पेंशन योजना का सबसे बड़ा लाभ उन सरकारी कर्मचारियों को मिला जिन्होंने लंबी सेवा दी और 2004 से पहले रिटायर हुए। उन्हें आज भी नियमित पेंशन और महंगाई भत्ते का लाभ मिल रहा है। साथ ही पारिवारिक पेंशन भी इस योजना का अहम हिस्सा रही है, जो आश्रितों के लिए बड़ा सहारा बनी।
निष्कर्ष
हालांकि आज नई भर्तियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं है, लेकिन इसकी विरासत आज भी जीवित है। कर्मचारियों के लिए OPS आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक बनी हुई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार OPS जैसी सुरक्षा देने के लिए NPS को कितना बेहतर बनाती है या कोई नया संतुलित मॉडल सामने आता है।