Land Registry Rule 2026 भारत में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवाद लंबे समय से एक बड़ी समस्या बने हुए हैं। फर्जी दस्तावेज, डुप्लीकेट रजिस्ट्री और भूमि माफियाओं के कारण आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के उद्देश्य से सरकार ने Land Registry Rule 2026 को लाने की तैयारी की है। यह नया नियम 117 साल पुराने रजिस्ट्रेशन अधिनियम की जगह ले सकता है, जिसे ब्रिटिश काल में लागू किया गया था।
सरकार का मानना है कि पुराने कानून अब वर्तमान डिजिटल और तकनीकी युग के अनुसार पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए जमीन की खरीद बिक्री को पारदर्शी, सुरक्षित और आसान बनाने के लिए नए नियमों की जरूरत महसूस की जा रही थी।
117 साल पुराना नियम क्यों किया जा रहा है खत्म
मौजूदा रजिस्ट्रेशन अधिनियम अंग्रेजों के समय बनाया गया था, जब न तो डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था थी और न ही ऑनलाइन सत्यापन की सुविधा। इसी वजह से जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और विवाद बढ़ते चले गए।
Land Registry Rule 2026 के तहत सरकार पूरे सिस्टम को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। इससे न केवल दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे बल्कि किसी भी तरह की हेराफेरी की संभावना भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को किया जाएगा अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार जमीन की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने की योजना है। इसका मतलब यह है कि अब दस्तावेज जमा करना, सत्यापन करना और रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र प्राप्त करना डिजिटल माध्यम से संभव होगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में एक मसौदा तैयार किया है, जिसे जनता की राय के लिए जारी किया गया है। इसका उद्देश्य पूरे देश में एक समान भूमि पंजीकरण व्यवस्था लागू करना है।
आधार आधारित सत्यापन से बढ़ेगी पारदर्शिता
Land Registry Rule 2026 में आधार आधारित सत्यापन को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जमीन खरीदने या बेचने वाले व्यक्ति को आधार के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी।
हालांकि जो लोग आधार नंबर साझा नहीं करना चाहते हैं, उनके लिए वैकल्पिक पहचान सत्यापन की सुविधा भी दी जाएगी। यह कदम धोखाधड़ी, बेनामी संपत्ति और फर्जी रजिस्ट्रेशन को रोकने में काफी मददगार साबित होगा।
डिजिटल प्रमाण पत्र और रिकॉर्ड होंगे सुरक्षित
नए नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन के बाद मिलने वाला प्रमाण पत्र भी डिजिटल फॉर्म में उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही जमीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड का डिजिटल रखरखाव किया जाएगा।
इससे भविष्य में दस्तावेज खोने, जलने या नष्ट होने की समस्या खत्म हो जाएगी। जरूरत पड़ने पर कभी भी ऑनलाइन रिकॉर्ड देखा और डाउनलोड किया जा सकेगा।
पूरे देश में एक समान कानून लागू करने की तैयारी
अभी तक राज्य सरकारों को भूमि रजिस्ट्रेशन कानून में संशोधन का अधिकार है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार की अनुमति जरूरी होती है। कई राज्यों ने पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की अनुमति दे दी है।
इसी असमानता को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार एक ऐसा कानून लाना चाहती है, जो पूरे देश में समान रूप से लागू हो सके। इससे अलग अलग राज्यों में अलग नियमों की वजह से होने वाली परेशानियां भी खत्म होंगी।
किन दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी
मसौदा विधेयक के अनुसार अब एग्रीमेंट टू सेल, सेल सर्टिफिकेट, पावर ऑफ अटॉर्नी और इक्विटेबल मॉर्टगेज जैसे दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि जमीन से जुड़ा हर लेनदेन कानूनी और पारदर्शी तरीके से हो।
निष्कर्ष
Land Registry Rule 2026 जमीन खरीद बिक्री के क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। डिजिटल रजिस्ट्रेशन, आधार सत्यापन और एक समान कानून से न केवल विवाद कम होंगे बल्कि आम लोगों को भी सुरक्षा और भरोसा मिलेगा। जमीन खरीदने से पहले नए नियमों की जानकारी रखना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है